एक नई तैयारी के साथ करेगें शुरुआत इस क्रिकेटर ने बताया अपने तीन साल का टारगेट

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मुम्बई।भारतीय क्रिकेट टीम के उपकप्तान सीधे हाथ के बल्लेबाज रोहित शर्मा ने अपनी योजना के बारे में बताया है कि वह कैसे अगामी मैच जीतना चाहते हैं,कितनी तैयारी के साथ मैदान में उतरेगें।क्या रहेगी उनकी रणनीति इन सब के बारे में बताया है।रोहित शर्मा 2015 और 2019 विश्व कप में भारतीय टीम का हिस्सा रह चुके हैं और दोनों बार टीम को सेमीफाइनल में क्रमश: आस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड से हार का सामना करना पड़ा था।

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रोहित शर्मा ने हाल में हरभजन सिंह के साथ इंस्टाग्राम पर कहा था कि उनका लक्ष्य भारतीय टीम को अगले तीन विश्व कप में से दो विश्व कप जिताने में मदद करना है. भारत को इस साल अक्टूबर-नवंबर में आस्ट्रेलिया में होने वाले टी 20 विश्व कप में भाग लेना है और फिर अगले साल उसे एक और टी 20 विश्व कप की मेजबानी करनी है. इसके बाद उसे 2023 में 50 ओवरों के विश्व कप की मेजबानी करनी है. रोहित ने कहा था, हमें पता है कि आगे अभी तीन विश्व कप हैं. इन तीन विश्व कप में से हमें कम से कम दो विश्व कप जीतना है. यह मेरा लक्ष्य है.

आपको बता दें कि हिटमैन रोहित शर्मा ने अपना पहला वन डे मैच जून 2007 में ही खेल लिया था. लेकिन जब टीम इंडिया ने साल 2011 का विश्‍व कप जीता था, तब रोहित शर्मा उस टीम के मैंबर नहीं थे. भारत ने पहला विश्व कप साल 1983 में जीता था और उस वक्त भारतीय टीम के कप्तान कपिल देव हुआ करते थे. इसके बाद भारत ने साल 2011 में दूसरा विश्व कप जीता. क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर के सारे सपने पूरे हो चुके थे, लेकिन एक ही पूरा नहीं हो पाया था और वह था विश्व कप जीतना. अब ऐसा ही कुछ सपने का जिक्र रोहित शर्मा ने भी है. अगर कोई खिलाड़ी टीम इंडिया के लिए खेलने लगा हो और जब विश्व कप की बात आए तो उसे टीम से बाहर कर दिया जाए तो उस खिलाड़ी पर क्या बीतेगी, यह आसानी से नहीं समझा जा सकता.

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रोहित शर्मा ने अपना पहला मैच 23 जून 2007 में आयरलैंड के खिलाफ खेला था. हालांकि इस मैच में रोहित शर्मा की बल्लेबाजी ही नहीं आ पाई थी, यानी उस मैच में उन्होंने बल्लेबाजी ही नहीं की. उस मैच में राहुल द्रविड़ टीम के कप्तान थे और भारत की ओर से सलामी बल्लेबाजी करने उतरे सौरव गांगुली, सचिन तेंदुलकर और उसके बाद गौतम गंभीर ने ही टीम को जीत दिला दी थी. इसके बाद 26 जून 2007 को फिर रोहित शर्मा दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ खेलने उतरे. इस मैच में रोहित शर्मा ने आठ रन बनाए थे. यह वही मैच था, जिसमें सचिन तेंदुलकर 99 रन पर आउट हो गए थे और भारत ने यह मैच चार विकेट से गंवा दिया था. एमएस धोनी इस मैच में भी नहीं खेले थे. जैसे रोहित शर्मा के पहले मैच में नहीं थे.

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साल 2011 में रोहित शर्मा ने 23 जनवरी को आखिरी मैच खेला था. इसके बाद विश्व कप शुरू हो गया और रोहित शर्मा टीम इंडिया से बाहर हो गए. इसके बाद जब अप्रैल में भारत ने विश्व कप जीत लिया तो उसके बाद छह जून 2011 में उन्हें फिर से टीम में शामिल कर लिया गया. यानी जिस बीच विश्व कप खेला गया, ठीक उसी दौरान रोहित शर्मा टीम के साथ नहीं थे. हालांकि आंकड़ों को देखा जाए तो पता चलेगा कि उस वक्त रोहित शर्मा कोई खास रन नहीं बना रहे थे. 23 जनवरी से पहले खेले गए 12 मैचों में रोहित शर्मा कोई अर्धशतक तक नहीं लगा पाए थे. यही कारण था कि विश्व कप में उनके नाम पर विचार नहीं किया गया. इस तरह से देखें तो रोहित शर्मा के लिए यह दौर निराशाजनक रहा. भारत ने विश्व कप जीत लिया और रोहित शर्मा उस टीम के साथ नहीं थे. रोहित शर्मा इसके लिए निराशा जता चुके हैं, हालांकि उन्होंने माना है कि उस दौरान वे इसलिए नहीं खेल पाए, क्योंकि उनका फार्म अच्छा नहीं था. उसके बाद से रोहित दो विश्व कप और खेल चुके हैं, लेकिन हर बार भारत को निराशा ही हाथ लगी है.

अब रोहित शर्मा ने एक बार फिर विश्‍व कप जीतने की मंशा जताई है. रोहित शर्मा दो विश्‍व कप जीत चुके हैं, लेकिन दोनों बार टी इंडिया सेमीफाइनल से बाहर हो गई थी. रोहित शर्मा ने मुंबई इंडियंस के ट्विटर पर एक संदेश में कहा, हर बार आप मैदान में जाते हैं और हर बार जीतना चाहते हैं, लेकिन विश्व कप हर किसी का एक शिखर है. मैं विश्व कप जीतना चाहता हूं.

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