अवैध है 7 मंजिला बिल्डिंग: जमात ने किया गैर-कानूनी निर्माण, टैक्स भी नहीं भरा, अब चलेगा बुल……

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जी हाँ सही सुना आपने निजामुद्दीन इलाके में तबलीगी जमात के मुख्यालय के ‘अच्छे दिन’ आखिरकार अब समाप्त होने जा रहे हैं। नगर निगम इस इमारत से संबंधित दस्तावेजों को खंगाल रहा है और अब इस इमारत के अवैध निर्माण को तोड़ने की तमाम कागजी कार्रवाई शुरू हो चुकी है।

दरअसल इस कार्यक्रम के सामने आने के बाद से एक-दो नहीं बल्कि कई ऐसे मामलों से पर्दा उठा है, जिन्हें लेकर अब तक किसी का भी ध्यान इनकी ओर नहीं गया था।

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गृह मंत्रालय ने ऐसे जमातियों, जिन्होंने हाल ही में भारत की यात्रा की है और वीजा नियमों व शर्तों की अवहेलना की है, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए उनके वीजा निरस्त करने के साथ ही उन्हें ब्लैकलिस्ट किया। इसके बाद सबसे बड़ी गाज अब इस मरकज के मूल, यानी इस बिल्डिंग पर गिरने वाली है।

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रिपोर्ट्स के अनुसार, शासन ने अपनी जाँच में पाया है कि दक्षिणी दिल्ली में निजामुद्दीन स्थित तबलीगी जमात के मरकज का निर्माण नियमों को ताक पर रखकर किया गया है। यही नहीं, जिस जमीन पर इस मरकज का निर्माण हुआ है, उसके मालिकाना हक से जुड़े कागजात भी दक्षिण दिल्ली नगर निगम (South Delhi Municipal Corporation) के पास नहीं हैं।


दक्षिणी दिल्ली नगर निगम की स्टैंडिंग कमिटी के डिप्टी चेयरमैन राजपाल सिंह ने बताया कि बिल्डिंग को सील कर दिया गया है। अब इसे ढहाने की कार्रवाई के लिए फाइल तैयार की जा रही है। 

बताया जा रहा है कि स्थानीय लोगों ने इसके अवैध निर्माण की बार-बार शिकायत भी की, लेकिन न तो निगम ने कोई कार्रवाई की और न ही पुलिस या अन्य किसी विभाग ने इस पर ध्यान दिया।

कागज और वैधता के सबूत माँगने पर मुशर्रफ (जो कि इंतजामिया कमिटी, मरकज के सदस्य हैं) का कहना है कि मरकज का निर्माण नियमानुसार किया गया है, और उनके पास इसके सभी कागज भी हैं। लेकिन 21 दिन के लॉकडाउन के कारण उन्हें कागज ढूँढने में परेशानी आ रही है। मुशर्रफ का कहना है कि हालात सामान्य होते ही वो दस्तावेज (कागज) पेश कर देंगे।

तबलीगी मस्जिद के इस मामले के प्रकाश में आने के बाद अब नया सवाल यह है कि ऐसे और भी कितनी मजहबी जगह हो सकती हैं, जिनके निर्माण से लेकर उनमें होने वाली गतिविधियाँ भी संदेह के घेरे में आती हैं।

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दक्षिणी दिल्ली नगर निगम (SDMC) के अनुसार, मरकज से पहले इस जगह सिर्फ एक मस्जिद थी और वर्ष 1992 में मदरसे को तोड़कर इस जगह पर एक मदरसे का निर्माण किया गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि धीरे-धीरे इस जगह पर तकरीबन 70% हिस्से का अवैध निर्माण कर मरकज की इमारत तैयार की गई। घनी आबादी में बनी इस बिल्डिंग में आग से सुरक्षा के भी कोई इंतजाम नहीं है और न ही कभी अग्निशमन विभाग से एनओसी ली गई है।

इन विवादों के बीच जानकारी मिल रही है कि दक्षिणी दिल्ली नगर निगम इस इमारत से संबंधित दस्तावेजों को खंगाल रहा है और अब इस इमारत के अवैध निर्माण को तोड़ने की तमाम कागजी कार्रवाई शुरू हो चुकी है।

मरकज की बिल्डिंग रिहायशी इलाके में करीब 2,000 गज में बनी है। जबकि नियमानुसार इसकी ऊँचाई 15 मीटर से अधिक नहीं होनी चाहिए, वहीं इसकी ऊँचाई 25 मीटर पाई गई है। ख़ास बात यह है कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (ASI) की बिल्डिंग इस मरकज के पास ही स्थित होने के बावजूद यहाँ पर अवैध रूप से सात मंजिला भवन का निर्माण कर लिया गया।

Sourced BY – hindi.opindia.com

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